Aug 28, 2010

हिन्द-युग्म: क्रोध से बौरा गए होंगे नदी-नाले सभी

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4 comments:

मनोज कुमार said...

सर,
यूनीकोड फॉंट में लिखिए।
वरना कुछ ठीक नहीं दिख रहा।

Babli said...

आपकी टिपण्णी के लिए बहुत बहुत शुक्रिया!

rohit said...

mahendra ji,
dhanyavad mera geet apne pasand kiya.
bemetra ke kya haal hai. arsa ho gaya durg me rahe huye.
kabhi mulakat hogi chhatisgarh visit ke douran.

rohit g.r.
rohitkalyaan@gmail.com

देवेन्द्र पाण्डेय said...

जैसा नाम वैसा गुण।
इस ब्लॉग में सजाए गए शाश्वत शिल्प ने पहले पोस्ट तो ध्यान आकर्षित किया।
..बहुत खूब।