Aug 14, 2011

देश हमारा

,
आलोकित हो दिग्दिगंत, वह दीप जलाएं,
देश हमारा झंकृत हो, वह साज बजाएं।


जन्म लिया हमने, भारत की पुण्य धरा पर,
सकल विश्व को इसका गौरव-गान सुनाएं।


कभी दूध की नदियां यहां बहा करती थीं,
आज ज्ञान-विज्ञान-कला की धार बहाएं।


अनावृत्त कर दे रहस्य जो दूर करे भ्रम,
ऐसे सद्ग्रंथों का रचनाकार कहाएं।


गौतम से गांधी तक सबने इसे संवारा,
आओ मिल कर और निखारें मान बढ़ाएं।


भाग्य कुपित है कहते, जो हैं बैठे ठाले,
कर्मशील कर उनको जीवन-गुर सिखलाएं।


कोटि-कोटि हाथों का श्रम निष्फल न होगा,
धरती को उर्वरा, देश को स्वर्ग बनाएं।

                                                                    -महेंद्र वर्मा

50 comments:

!!अक्षय-मन!! said...

waaah sundar...ekta ka geet desh ka geet mera geet hum sabka geet....bas yahi sankalp...sabka hona hai...

Dr Varsha Singh said...

ओजस्वी रचना....
रक्षाबंधन एवं स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

Shalini kaushik said...

कोटि-कोटि हाथों का श्रम निष्फल न होगा,
धरती को उर्वरा, देश को स्वर्ग बनाएं।
सुन्दर आशा जगाती पंक्तियाँ

Anonymous said...

कोटि-कोटि हाथों का श्रम निष्फल न होगा,
धरती को उर्वरा, देश को स्वर्ग बनाएं।
..ओजस्वी रचना....
रक्षाबंधन एवं स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') said...

कितने सुन्दर भाव हैं महेंद्र भईया...

“जैसे इक झरता झरना, उत्साह उडाता है वन में
वैसे यह सुन्दर रचना, सद्भाव जगाता है मन में”

हार्दिक बधाएयाँ और शुभकामनाएं....
सादर...

Anupama Tripathi said...

कोटि-कोटि हाथों का श्रम निष्फल न होगा,
धरती को उर्वरा, देश को स्वर्ग बनाएं।
सुंदर भाव लिए हुए देशभक्ति से भरी रचना ....
बधाई.

अजय कुमार said...

प्रेरक देश-गीत

virendra sharma said...

महेंद्र वर्मा जी भारत में सम्मोहन चिकित्सा का स्तेमाल मनो -रोगों के प्रबंधन में कुछ सम्मोहन -विद्या के माहिर करते रहें हैं लेकिन कई इसका स्तेमाल आपको पूर्व जन्म का वृत्तांत बतलाने में कर रहें हैं .रिग्रेशन थिरेपी की आड़ लेकर .एक धारावाहिक इसको समर्पित रहा है .
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virendra sharma said...

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virendra sharma said...

भाग्य कुपित है कहते, जो हैं बैठे ठाले,
कर्मशील कर उनको जीवन-गुर सिखलाएं।बहुत ही सार्थक ,उत्प्रेरक ,ओजपूर्ण गीत -सौदेश्य गीत - हरेक बंद एक अलग सन्देश लिए कैप्स्यूल सा असरकारी .
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virendra sharma said...

भाग्य कुपित है कहते, जो हैं बैठे ठाले,
कर्मशील कर उनको जीवन-गुर सिखलाएं।बहुत ही सार्थक ,उत्प्रेरक ,ओजपूर्ण गीत -सौदेश्य गीत - हरेक बंद एक अलग सन्देश लिए कैप्स्यूल सा असरकारी .
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अरुण चन्द्र रॉय said...

गौतम से गांधी तक सबने इसे संवारा,
आओ मिल कर और निखारें मान बढ़ाएं।....

इस आह्वान की देश को जरुरत है आज... बढ़िया ग़ज़ल...

S.N SHUKLA said...

बहुत सुन्दर रचना, सार्थक प्रस्तुति .
भारतीय स्वाधीनता दिवस की ढेर सारी शुभकामनाएं .

ashish said...

सुँदर भावोंकी वाली पंक्तियाँ / देश प्रेम की गंगा बह रही है .

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

आज 14 - 08 - 2011 को आपकी पोस्ट की चर्चा यहाँ भी है .....


...आज के कुछ खास चिट्ठे ...आपकी नज़र .तेताला पर
____________________________________

vandan gupta said...

देश प्रेम से ओत-प्रोत रचना।

Shikha Kaushik said...

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनायें .सार्थक रचना हेतु आभार .
devi chaudhrani

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत सुन्दर भावों से आह्वान किया है अपनी मात्रभूमि को सजने संवारने के लिए

Bharat Bhushan said...

बहुत सुंदर तरीके से देश के लिए शुभकामनाएँ दी गई हैं. रक्षाबंधन एवं स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक मंगलकामनाएं.

Unknown said...

ओजस्वी रचना....

सुन्दर आह्वान, स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

दिवस said...

बहुत सुन्दर रचना, देशप्रेम से सराबोर...

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार said...

प्रियवर महेन्द्र जी
सादर सस्नेहाभिवादन !

बहुत अच्छा लिखा है , हमेशा की तरह …
कोटि-कोटि हाथों का श्रम निष्फल न होगा,
धरती को उर्वरा, देश को स्वर्ग बनाएं


सुंदर भाव ! सुंदर आह्वान !
हार्दिक बधाई और मंगलकामनाएं !


रक्षाबंधन एवं स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाओ के साथ

-राजेन्द्र स्वर्णकार

दिगंबर नासवा said...

कोटि-कोटि हाथों का श्रम निष्फल न होगा,
धरती को उर्वरा, देश को स्वर्ग बनाएं।..

ओज़स्वी .. देश प्रेम में पगी लाजवाब रचना ..

जयकृष्ण राय तुषार said...

देशप्रेम से ओतप्रोत एक अद्भुत रचना भाई महेंद्र जी स्वतंत्रता दिवस की बधाई और शुभकामनायें

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

आपके इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल दिनांक 15-08-2011 को चर्चा मंच http://charchamanch.blogspot.com/ पर भी होगी। सूचनार्थ

Maheshwari kaneri said...

देशप्रेम से ओतप्रोत एक सुन्दर रचना ....

Rahul Singh said...

सार्थक विचार, शुभ संकल्‍प.

संतोष त्रिवेदी said...

देश-प्रेम को सपर्पित आपके विचारों में मेरा भी एक सुर मिला लें !

Kunwar Kusumesh said...

देशप्रेम से ओतप्रोत.
सुन्दर प्रस्तुति.
स्वतन्त्रता दिवस की शुभकामनाएँ.

रश्मि प्रभा... said...

अनावृत्त कर दे रहस्य जो दूर करे भ्रम,
ऐसे सद्ग्रंथों का रचनाकार कहाएं।
aameen

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

स्वतन्त्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं और ढेर सारी बधाईयां

Kavita Rawat said...

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनायें
सार्थक रचना हेतु आभार!

Urmi said...

सुन्दर अभिव्यक्ति के साथ भावपूर्ण कविता लिखा है आपने! शानदार प्रस्तुती!
आपको एवं आपके परिवार को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनायें!
मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
http://seawave-babli.blogspot.com/
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रेखा said...

कोटि-कोटि हाथों का श्रम निष्फल न होगा,
धरती को उर्वरा, देश को स्वर्ग बनाएं।

स्वतन्त्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

Dorothy said...

सुंदर प्रेरक प्रस्तुति. आभार. स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनायें...
सादर,
डोरोथी.

Rachana said...

कोटि-कोटि हाथों का श्रम निष्फल न होगा,
धरती को उर्वरा, देश को स्वर्ग बनाएं।
bahut sunder
aapko svatantrata divas ki bahut bahut badhai
rachana

amrendra "amar" said...

आपको एवं आपके परिवार को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनायें!

संजय भास्‍कर said...

सुंदर भाव लिए हुए देशभक्ति से भरी रचना ....

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं….!

जय हिंद जय भारत

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

सचमुच आज से ६४ साल पहले ऐसे ही भारत की कल्पना की थी.. आपने जितने सुन्दर छंदों में सजाया है इस देश को सत्तालोलुप जनसेवकों ने उसे कितना विकृत और विद्रूप कर दिया है!!
वर्मा साहब! परमात्मा से यही प्रार्थना है कि हमारा देश वैसा हेई हो जैसा आपकी इस कविता में वर्णित है..

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Reading this kind of article is worthy .It was easy to understand way of presentation are excellent.

ZEAL said...

very inspiring and motivating creation.

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" said...

बहुत सुन्दर रचना ......... भारत ज़रूर फिर विश्व का ताज बनेगा

Dr (Miss) Sharad Singh said...

गौतम से गांधी तक सबने इसे संवारा,
आओ मिल कर और निखारें मान बढ़ाएं।

आग्रहपूर्ण सुन्दर अभिव्यक्ति...

ज्ञानचंद मर्मज्ञ said...

गौतम से गांधी तक सबने इसे संवारा,
आओ मिल कर और निखारें मान बढ़ाएं।

एक एक पंक्ति देश भक्ति के जज्बे को जगाने में सक्षम !

Urmi said...

मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
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virendra sharma said...

भाग्य कुपित है कहते, जो हैं बैठे ठाले,
कर्मशील कर उनको जीवन-गुर सिखलाएं।आज फिर पढ़ी यह "आदर्श भारत " का स्वप्न संजोती रचना ,उतनी ही खूबसूरत सद्यस्नाता सी ,मौजू ,प्रासंगिक .
जो चाहें मिलता नहीं, मिलता अनानुकूल,
सोच सोच सब ढो रहे, मन भर दुख सा शूल।वाह भाई साहब यही तो ज़िन्दगी का यथार्थ है जीवन एक पैकेज हैबेहद खूबसूरत नीति परक दोहे हमारे वक्त की ज़रुरत हैं . यहाँ कडवा मीठा सब है ,ऐसा नहीं है ,कडवा कडवा थू ,मीठा मीठा गप . ram ram bhai

शनिवार, २० अगस्त २०११
कुर्सी के लिए किसी की भी बली ले सकती है सरकार ....
स्टेंडिंग कमेटी में चारा खोर लालू और संसद में पैसा बंटवाने के आरोपी गुब्बारे नुमा चेहरे वाले अमर सिंह को लाकर सरकार ने अपनी मनसा साफ़ कर दी है ,सरकार जन लोकपाल बिल नहीं लायेगी .छल बल से बन्दूक इन दो मूढ़ -धन्य लोगों के कंधे पर रखकर गोली चलायेगी .सेंकडों हज़ारों लोगों की बलि ले सकती है यह सरकार मन मोहनिया ,सोनियावी ,अपनी कुर्सी बचाने की खातिर ,अन्ना मारे जायेंगे सब ।
क्योंकि इन दिनों -
"राष्ट्र की साँसे अन्ना जी ,महाराष्ट्र की साँसे अन्ना जी ,
मनमोहन दिल हाथ पे रख्खो ,आपकी साँसे अन्नाजी .
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Saturday, August 20, 2011
प्रधान मंत्री जी कह रहें हैं .....

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Apanatva said...

सुंदर प्रेरक प्रस्तुति.

Amrita Tanmay said...

अच्छा लगा आपको पढ़ना. आभार |

Ojaswi Kaushal said...

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shikha panchal said...

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