Jun 16, 2012

उम्र भर



जख़्म सीने में पलेगा उम्र भर,
गीत बन-बन कर झरेगा उम्र भर।

घर का हर कोना हुआ है अजनबी,
आदमी ख़ुद से डरेगा उम्र भर।

जो अंधेरे को लगा लेते गले,
नूर उनको क्या दिखेगा उम्रं भर।

दिल के किस कोने में जाने कब उगा,
ख़्वाब है मुझको छलेगा उम्र भर।

कर रहा कुछ और कहता और है,
वो मुखौटा ही रखेगा उम्र भर।

छल किया मैंने मगर नेकी समझ,
याद वो मुझको करेगा उम्र भर।

वक़्त की परवाह जिसने की नहीं,
हाथ वो मलता रहेगा उम्र भर।

                                                                     -महेन्द्र वर्मा

39 comments:

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

घर का हर कोना हुआ है अजनबी,
आदमी ख़ुद से डरेगा उम्र भर।


छल किया मैंने मगर नेकी समझ,
याद वो मुझको करेगा उम्र भर।

बहुत खूबसूरत गजल ... ज़िंदगी की सच्चाई को कहती हुई

vandan gupta said...

वाह बहुत सुन्दर गज़ल

ANULATA RAJ NAIR said...

वाह...
बहुत सुन्दर गज़ल...

घर का हर कोना हुआ है अजनबी,
आदमी ख़ुद से डरेगा उम्र भर।

दिल ने चाहा कि खत्म ही न हों शेर.....
सादर

Bharat Bhushan said...

ग़ज़ल मन को बहुत भा गई

दिल के किस कोने में जाने कब उगा,
ख़्वाब है मुझको छलेगा उम्र भर।

क्या बात है महेंद्र जी. दिल की कई बातें इस ग़ज़ल ने कहीं हैं.

मेरा मन पंछी सा said...

बहुत ही बेहतरीन गजल है...
वक़्त की परवाह जिसने की नहीं,
हाथ वो मलता रहेगा उम्र भर।
बेहतरीन पंक्तिया...
:-)

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

वक़्त की परवाह जिसने की नहीं,
हाथ वो मलता रहेगा उम्र भर।

बहुत बेहतरीन सुंदर गजल ,,,,,

RECENT POST ,,,,पर याद छोड़ जायेगें,,,,,

सदा said...

बहुत खूब ... बेहतरीन प्रस्‍तुति।

ZEAL said...

छल किया मैंने मगर नेकी समझ,
याद वो मुझको करेगा उम्र भर।

Very impressive..
.

संध्या शर्मा said...

जख़्म सीने में पलेगा उम्र भर,
गीत बन-बन कर झरेगा उम्र भर।
बहुत खूबसूरत ख्याल... सुन्दर ग़ज़ल के लिए आभार आपका

Unknown said...

छल किया मैंने मगर नेकी समझ,
याद वो मुझको करेगा उम्र भर।

वक़्त की परवाह जिसने की नहीं,
हाथ वो मलता रहेगा उम्र भर।

अद्भुत भाव समेटे लाइन जहाँ हम खुद से बाते करते है ...
हमेशा की तरह लाजवाब ...बारीक़ संवेदनाओं की झड़ी के लिए बधाई

Anupama Tripathi said...

वक़्त की परवाह जिसने की नहीं,
हाथ वो मलता रहेगा उम्र भर।

सार्थक ...बहुत सुंदर अभिव्यक्ति ...

Asha Lata Saxena said...

बहुत सुन्दर और भावपूर्ण रचना |
आशा |

रविकर said...

बढ़िया प्रस्तुति भाई जी |
बधाई स्वीकारें ||

virendra sharma said...

वक़्त की परवाह जिसने की नहीं,
हाथ वो मलता रहेगा उम्र भर।

वक़्त की परवाह जिसने की नहीं,
हाथ वो मलता रहेगा उम्र भर।
उम्र भर लिखें भाई साहब ,उम भर छप रहा है हर जगह .

virendra sharma said...

वक़्त की परवाह जिसने की नहीं,
हाथ वो मलता रहेगा उम्र भर।

वक़्त की परवाह जिसने की नहीं,
हाथ वो मलता रहेगा उम्र भर।
उम्र भर लिखें भाई साहब ,उम भर छप रहा है हर जगह .

दीपिका रानी said...

sundar ghazal

मनोज कुमार said...

आपकी ग़ज़ल से गुज़रना एकदम नए अनुभव से गुज़रना है क्योंकि इसमें यथार्थ इकहरा नहीं है, बल्कि यहां आज के जटिलतम यथार्थ को उघाड़ते अनेक स्तर हैं।

संजय @ मो सम कौन... said...

वही सादगी और गहराई फिर से दिखी, जिसके हम मुरीद हैं|

लोकेन्द्र सिंह said...

जो अंधेरे को लगा लेते गले,
नूर उनको क्या दिखेगा उम्रं भर....
सार्थक सन्देश देते सभी शेर...

ब्लॉ.ललित शर्मा said...

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बेहतरीन रचना - राम राम वर्मा जी


दंतैल हाथी से मुड़भेड़
सरगुजा के वनों की रोमांचक कथा



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ब्लॉ.ललित शर्मा
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Suman said...

कर रहा कुछ और कहता और है,
वो मुखौटा ही रखेगा उम्र भर।
sahi kaha hai har pankti sundar ...

Naveen Mani Tripathi said...

BAHUT HI SUNDAR RACHANA ....BADHAI SIR.

Anamikaghatak said...

apki rachana jisne padha nahi
हाथ वो मलता रहेगा उम्र भर।

Amrita Tanmay said...

आपके माध्यम से यथार्थ से रु-ब-रु होना अलग ही अहसास देती है..

Kailash Sharma said...

घर का हर कोना हुआ है अजनबी,
आदमी ख़ुद से डरेगा उम्र भर।

....लाज़वाब ! बेहतरीन गज़ल...

sushma verma said...

बेहतरीन गज़ल...

रजनीश तिवारी said...

वक़्त की परवाह जिसने की नहीं,
हाथ वो मलता रहेगा उम्र भर।

बहुत खूबसूरत ग़ज़ल ...

डॉ. मोनिका शर्मा said...

कर रहा कुछ और कहता और है,
वो मुखौटा ही रखेगा उम्र भर।

Bahut Umda...

अनुपमा पाठक said...

वाह!

Vandana Ramasingh said...

जो अंधेरे को लगा लेते गले,
नूर उनको क्या दिखेगा उम्रं भर।

कर रहा कुछ और कहता और है,
वो मुखौटा ही रखेगा उम्र भर।

bahut badhiya

निवेदिता श्रीवास्तव said...

दिल के किस कोने में जाने कब उगा,
ख़्वाब है मुझको छलेगा उम्र भर।
...... बेहतरीन !!!

रचना दीक्षित said...

वक़्त की परवाह जिसने की नहीं,
हाथ वो मलता रहेगा उम्र भर।

गज़ल में इतना सुंदर सन्देश निहित है जो इसके भावपक्ष प्रबल बनाता है.

बधाई.

दिगंबर नासवा said...

वक़्त की परवाह जिसने की नहीं,
हाथ वो मलता रहेगा उम्र भर।..

बहुत खूब .... हर शेर कुछ कहता हुवा ... लाजवाब गज़ल है सुभान अल्ला ...

ऋता शेखर 'मधु' said...

घर का हर कोना हुआ है अजनबी,
आदमी ख़ुद से डरेगा उम्र भर।

वक़्त की परवाह जिसने की नहीं,
हाथ वो मलता रहेगा उम्र भर।

खूबसूरत ग़ज़ल...सत्य और संदेश का संगम|

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) said...

दिल के किस कोने में जाने कब उगा,
ख़्वाब है मुझको छलेगा उम्र भर।

कर रहा कुछ और कहता और है,
वो मुखौटा ही रखेगा उम्र भर।

बहुत ही खूबसूरत गज़ल, वाह !!!!!!!!!!

Pawan Kumar said...

वर्मा जी
अच्छी और नाज़ुक एहसासात से रची बसी रचना...
दिल के किस कोने में जाने कब उगा,
ख़्वाब है मुझको छलेगा उम्र भर।
यूँ तो पूरी ग़ज़ल उम्दा मगर ये शेर खास काबिले दाद है.
अच्छी रचना

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') said...

बहुत उम्दा गजल...
सादर.

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

मन को प्रभावित करती सुंदर गजल ,,,,,

RECENT POST,,,,,काव्यान्जलि ...: आश्वासन,,,,,

Rakesh Kumar said...

कालोSस्मि लोकक्षयकृत्प्रवृद्धो

काल या वक़्त भगवान की ही तो विभूति है.

बहुत सुन्दर भावमय प्रस्तुति.