Aug 30, 2013

नेह का दीप

सहमे से हैं लोग न जाने किसका डर है,
यही नज़ारा रात यही दिन का मंजर है।

दुनिया भर की ख़ुशियां नादानों के हिस्से,
अल्लामा को दुख सहते देखा अक्सर है।

सच कहते हैं लोग समय बलवान बहुत है,
रहा कोई महलों में लेकिन अब बेघर है।

हसरत भरी निगाहें तकतीं नील गगन में,
मगर कहां परवाज हो चुके हम बेपर हैं।

अच्छी सूरत वालों ने इतिहास बिगाड़ा,
सीरत जिसकी अच्छी बेशक वह सुंदर है।

मैं तो हूं बंदे का मालिक मेरा क्या है,
जहां नेह का दीप जले मेरा मंदर है।

मेरे मन की बात समझ न पाओगे तुम,
तेरे मेरे दुख में शायद कुछ अंतर है।

                                                   
- महेन्द्र वर्मा

17 comments:

Shikha Kaushik said...

sundar v sarthak abhivyakti .hardik aabhar

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

वाह!!!बहुत बढ़िया उम्दा गजल ,,,

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Vandana Ramasingh said...

अच्छी सूरत वालों ने इतिहास बिगाड़ा,
सीरत जिसकी अच्छी बेशक वह सुंदर है।

बहुत बढ़िया ग़ज़ल

Vandana Ramasingh said...

बहुत दिनों बाद आपकी रचना पढने को मिली

अच्छी सूरत वालों ने इतिहास बिगाड़ा,
सीरत जिसकी अच्छी बेशक वह सुंदर है।

बहुत बढ़िया ग़ज़ल

Amrita Tanmay said...

अक्षरश: अति सुन्दर कहा है ..

Asha Lata Saxena said...

हसरत भरी निगाहें तकती नील गगन में
मगर कहाँ परवाजहो चुके हम बेधार हैं |
बढ़िया पंक्ति |भावपूर्ण रचना |
आशा

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत खूबसूरत गज़ल ....

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत खूबसूरत गज़ल ....

अनुपमा पाठक said...

दुनिया भर की ख़ुशियां नादानों के हिस्से,
अल्लामा को दुख सहते देखा अक्सर है।

अक्षरशः सत्य!
बेहद सुन्दर ग़ज़ल!

Unknown said...

सहमे से हैं लोग न जाने किसका डर है,
यही नज़ारा रात यही दिन का मंजर है।

किसे कहूँ जो दिल पर अपने छाप नहीं बना गए एक से सात तक बेहतरीन से बेहतरीन
कहा छुआ कर रखते हैं कभी हमें भी वहां घुमाने ले चलिए प्रणाम

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

क्या बात वाह!

रविकर said...

सुन्दर आदरणीय-
बधाई-

अशोक सलूजा said...

बड़ी खूबसूरती से बयाँ किया है .....

Unknown said...

बहुत सुंदर...

दिगंबर नासवा said...

सच कहते हैं लोग समय बलवान बहुत है,
रहा कोई महलों में लेकिन अब बेघर है..

जीवन की हकीकत है ये ... समय से बढ़ के कोई नहीं ... लाजवाब गज़ल है ...

Bharat Bhushan said...

मैं तो हूं बंदे का मालिक मेरा क्या है,
जहां नेह का दीप जले मेरा मंदर है।

बहुत सुंदर कहा है.

अरुण चन्द्र रॉय said...

खूबसूरत गज़ल ...