सम्मोहन

अगर मैं ये कहूँ
कि
धर्म से हटा दो
आडम्बर पूरी तरह
तो
क्या तुम मुझे
जीने नहीं दोगे
और
अगर मैं ये कहूँ
कि
मैं धर्म में
मिला सकता हूं
कुछ और सम्मोहनकारी आडम्बर
तो
क्या तुम मुझे
महामंडलाधिपति बना दोगे !


                                                   -महेन्द्र वर्मा

14 comments:

निवेदिता श्रीवास्तव said...

ये तो ऐसा प्रश्न है जो अक्सर अनुत्तरित ही रह जाता है .... पर प्रश्न की शैली प्रभावित करती है

Bharat Bhushan said...

धर्म के क्षेत्र में पदोन्नति वाकई एक व्यापारिक लेन-देन है जिसके अपने नियम हैं. :)

Bharat Bhushan said...

धर्म के क्षेत्र में पदोन्नति वाकई एक व्यापारिक लेन-देन है जिसके अपने नियम हैं. :)

Anonymous said...

विशद प्रश्न

डॉ. मोनिका शर्मा said...

गहन … ज़रूरी सवाल उठाती रचना

Kavita Rawat said...

बहुत सुन्दर

Manoj Kumar said...

सुन्दर रचना

www.manojbijnori12.blogspot.com

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

सुन्‍दर प्रस्‍तुति

दिगम्बर नासवा said...

गहरा सटीक प्रश्न कुछ ठेकेदारों से समाज के ...

रचना दीक्षित said...

दोंनो ही परस्थितियों माँ अपना ही नुकसान है अच्छी प्रस्तुती बेहतरीन सवाल उठाती हुई

Kailash Sharma said...

बहुत गहन और सटीक प्रश्न उठाती सुन्दर अभिव्यक्ति..

Satish Saxena said...

धर्म के दुरूपयोग ने बर्बाद कर दिया इस देश को !

Vandana Ramasingh said...

धर्म के आडम्बर पर सटीक व्यंग्य आदरणीय बहुत बेहतरीन

संजय भास्‍कर said...

..... सटीक प्रश्न उठाती सुन्दर अभिव्यक्ति
बहुत दिनों बाद आना हुआ ब्लॉग पर प्रणाम स्वीकार करें !!