Jan 9, 2011

ज़िदगी से सुर मिलाना चाहिए

अब अंधेरे को डराना चाहिए
फिर कोई सूरज उगाना चाहिए।

शोर से ऊबी गली ने फिर कहा
झींगुरों को गुनगुनाना चाहिए।

जुगनुओं को देख तारे जल गए
अब हमें भी झिलमिलाना चाहिए।

प्यार के पल को समझने के लिए
सुन रहे हैं इक ज़माना चाहिए।

आदमी को कुछ नही तो कम से कम
जि़्दगी से सुर मिलाना चाहिए।

क्या पता कब दाग़ लग जाए कहीं
वक़्त से दामन बचाना चाहिए।

                                       -महेन्द्र वर्मा

43 comments:

Vijai Mathur said...

बहुत उत्तम सीख है.अगर लोग पालन करें तो और भी उत्तम बात होगी

ѕнαιя ∂я. ѕαηנαу ∂αηι said...

जुगनुओं को देख तारे जल गये,अब हमें भी झिलमिलाना चाहिये।
बहरे रम्ल में एक ख़ूबसूरत मुकम्मल ग़ज़ल के लिये वर्मा जी आप मुबारकबाद के मुस्तहक़ हैं ।

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

एक ज़बरदस्त इंक़लाब है इस ग़ज़ल में... बहुत ही सरल भाषा में, बिना कोई शब्दों काव्यर्थ जाल बुने,एक एक शेर अपनी बात गहराई सए कहता है.
कॉमा की जगह बड़ी कोष्ठक अखर रही है!

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

महेन्‍द्र जी, गजल के बहाने आपने बहुत प्‍यारी बातें कह दीं। बधाई।

---------
पति को वश में करने का उपाय।

ashish said...

सुन्दर सन्देश देती हुई इस सार्थक ग़ज़ल के लिए आपका आभार .

nilesh mathur said...

बहुत सुन्दर! बेहतरीन रचना!

मनोज कुमार said...

उम्दा ग़ज़ल, अच्छे ख़्यालात।

सुशील बाकलीवाल said...

बहुत उत्तम और व्यवहारिक सीख है आपकी इस रचना में-
आदमी को कुछ नही तो कम से कम
जि़ऩ्दगी से सुर मिलाना चाहिए।

Kunwar Kusumesh said...

जुगनुओं को देख तारे जल गए
अब हमें भी झिलमिलाना चाहिए

वाह वाह भाई,
खूब लिख रहे हैं और कमाल का लिख रहे हैं आप .
क्या बात है

mark rai said...

क्या पता कब दाग़ लग जाए कहीं
वक़्त से दामन बचाना चाहिए.....
very interesting ....

संजय भास्कर said...

महेन्‍द्र जी
नमस्कार !
सुन्दर सन्देश देती हुई इस सार्थक ग़ज़ल
पसंद आया यह अंदाज़ ए बयान आपका. बहुत गहरी सोंच है

उपेन्द्र ' उपेन ' said...

अब अंधेरे को डराना चाहिए
फिर कोई सूरज उगाना चाहिए।

महेंद्र जी बहुत ही सार्थक कदम के लिये प्रेरित करती सुंदर ग़ज़ल........ सुंदर प्रस्तुति.

'उदय' said...

प्यार के पल को समझने के लिए
सुन रहे हैं इक ज़माना चाहिए।
... bahut sundar !!

क्षितिजा .... said...

क्या पता कब दाग़ लग जाए कहीं
वक़्त से दामन बचाना चाहिए।

बहुत खूबसूरत ग़ज़ल महेंद्र जी ...

आपको और आपके परिवार को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ ....

Bhushan said...

बहुत ही प्यारी ग़ज़ल.

दीप्ति शर्मा said...

bahut sunder gajal

is bar mere blog par
"main"

shekhar suman said...

bahut hi gyaandayak seekh hai....
achhi panktiyaan....

निर्मला कपिला said...

प्यार के पल को समझने के लिए
सुन रहे हैं इक ज़माना चाहिए।
वाह बहुत सुन्दर गज़ल। बधाई।

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " said...

umda gazal.
har sher sundar!
nav jagran ka sandesh deti sarthak rachna.

दिगम्बर नासवा said...

प्यार के पल को समझने के लिए
सुन रहे हैं इक ज़माना चाहिए ..

Ye bhi sach hai ... par ye bhi sach hai ki kabhi kabhi pyaar ek pal mein hi samajh aa jata hai ...
bahut hi lajawaab hain sab sher Mahendr Ji ...

सतीश सक्सेना said...

बहुत प्यारी रचना है , हार्दिक शुभकामनायें वर्मा जी !

M VERMA said...

अब अंधेरे को डराना चाहिए
फिर कोई सूरज उगाना चाहिए।
यकीनन सुन्दर संकल्पित रचना और आह्वान...

ज्ञानचंद मर्मज्ञ said...

शोर से ऊबी गली ने फिर कहा
झींगुरों को गुनगुनाना चाहिए।

वाह !वाह !
इस शेर ने तो कमाल कर दिया !
धन्यवाद महेंद्र जी !
-ज्ञानचंद मर्मज्ञ

आशीष/ ਆਸ਼ੀਸ਼ / ASHISH said...

आनंद! आनंद! आनंद!
आशीष

ZEAL said...

.

प्यार के पल को समझने के लिए
सुन रहे हैं इक ज़माना चाहिए....

जो प्यार को नहीं समझते वो , उन्हें वाकई में एक ज़माना लगता है समझने में। और जो समझने वाले होते हैं वो कई ज़माने तक उन लम्हों को जीते हैं।


.

Majaal said...

आपकी तरह बाकी शायरों को भी,
नज़रिया-ए-उम्मीद अपनाना चाहिए ;)

बहुत अच्छे साहब , लिखते रहिये ...

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

आदमी को कुछ नहीं तो कम से कम

जिंदगी से सुर मिलाना चाहिए।

आज दुबारा आपकी गजल पढी, तो इस शेर पर नजर ठहर सी गयी। वाकई बहुत अच्‍छी बात कही आपने। बधाई।

---------
सांपों को दुध पिलाना पुण्‍य का काम है?

Sunil Kumar said...

शोर से ऊबी गली ने फिर कहा
झींगुरों को गुनगुनाना चाहिए।
वाह !वाह !शुभकामनायें....

Harman said...

Happy Lohri To You And Your Family..

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जयकृष्ण राय तुषार said...

bhai mahendraji bahut hi damdar prastuti badhai makar sankranti/pongal ki bhi

Patali-The-Village said...

बहुत ही सार्थक कदम के लिये प्रेरित करती सुंदर ग़ज़ल| बधाई।

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

आदमी को कुछ नही तो कम से कम
जि़्दगी से सुर मिलाना चाहिए।

सुंदर अभिव्यक्ति .....

anupama's sukrity ! said...

आदमी को कुछ नही तो कम से कम
जि़्दगी से सुर मिलाना चाहिए।

बहुत सुंदर मन पर छाप छोड़ती हुई रचना -
शुभकामनाएं
sahitya aur sangeet se mili hui veena hai --tabhi to itni sureeli hai.

डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति said...

बहुत सुन्दर गज़ल.. महेंद्र जी !! आज आपकी यह गज़ल चर्चामंच पर है..
...आपका धन्यवाद ...मकर संक्रांति पर हार्दिक बधाई

http://charchamanch.uchcharan.com/2011/01/blog-post_14.html

CS Devendra K Sharma "Man without Brain" said...

प्यार के पल को समझने के लिए
सुन रहे हैं इक ज़माना चाहिए।

nahi lagta ki pyar ko samjhne ke liye, ek zamaana guzaarna padega......

kehte hain in bhawnaaon ko samajhne ke liye to kshan bhar ke liye aankhe milna hi kaafi hai........

Navin C. Chaturvedi said...

अक्सर देखने में आता है कि लोग मतला और उस के बाद के चंद शे'र तो प्रभावशाली ले लेते हैं, और उस के बाद एक ऊब सी लगाने लगती है, पर महेंद्र भाई आपकी इस ग़ज़ल का हर एक शे'र पूरअसर है| बधाई|

कौशलेन्द्र said...

जुगनुओं को देख तारे जल गए ...

......प्रभावशाली ग़ज़ल...

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल बृहस्पतिवार 12 -04-2012 को यहाँ भी है

.... आज की नयी पुरानी हलचल में .....चिमनी पर टंगा चाँद .

expression said...

बहुत सुंदर भाव ........
प्यार के पल को समझने के लिए
सुन रहे हैं इक ज़माना चाहिए।

लाजवाब!!

सादर
अनु

प्रतिभा सक्सेना said...

बहुत ज़रूरी है ज़िन्दगी से सुर मिलाना !

संध्या शर्मा said...

आदमी को कुछ नही तो कम से कम
जिंदगी से सुर मिलाना चाहिए।
बिलकुल सही कहा है आपने... गहन अभिव्यक्ति

sushma 'आहुति' said...

अब अंधेरे को डराना चाहिए
फिर कोई सूरज उगाना चाहिए।bilkul sahi kaha apne....

***Punam*** said...

आदमी को कुछ नही तो कम से कम
जि़्दगी से सुर मिलाना चाहिए।

मिले सुर मेरा-तुम्हारा...
तो सुर बने हमारा...
और जब हमारा-तुम्हारा सुर मिले तो
जिंदगी से भी सुर मिल ही जाएगा...