Oct 23, 2011

झिलमिल झिलमिल झिलमिल


दीपों से आलोकित
डगर-डगर, द्वार-द्वार।


पुलकित प्रकाश-पर्व,
तम का विनष्ट गर्व,
यत्र-तत्र छूट रहे
जुग-जुगनू के अनार।


नव तारों के संकुल,
कोरस गाएं मिलजुल,
संगत करते सुर में,
फुलझडि़यों के सितार।


सब को शुभकामना,
सुख से हो सामना,
झिलमिल झिलमिल झिलमिल,
खुशियां छलके अपार।

                                          -महेंद्र वर्मा

45 comments:

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) said...

नव तारों के संकुल,
कोरस गाएं मिलजुल,
संगत करते सुर में,
फुलझडि़यों के सितार।

कविता का छंद्बद्ध प्रवाह इस सुर लहरी में दीपक राग की मानिंद दीपों की शिखाओं पर नर्तन कर गया है.अद्वितीय कल्पना. महेंद्र जी दीपोत्सव की शुभकामनायें.

अजय कुमार said...

सुंदर दीपावली गीत , हार्दिक शुभकामनायें दीपावली की

संतोष त्रिवेदी said...

दिवाली मा खूब झिलमिलाय दिहे हो ! शुभकामनाएँ !

Sunil Kumar said...

सुख से हो सामना,
दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें एवं बधाई

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

सुन्दर प्रस्तुति ...दीपावली की शुभकामनायें

S.N SHUKLA said...

सुन्दर सृजन , प्रस्तुति के लिए बधाई स्वीकारें.

समय- समय पर मिले आपके स्नेह, शुभकामनाओं तथा समर्थन का आभारी हूँ.

प्रकाश पर्व( दीपावली ) की आप तथा आप के परिजनों को मंगल कामनाएं.

virendra sharma said...

नव तारों के संकुल,
कोरस गाएं मिलजुल,
संगत करते सुर में,
फुलझडि़यों के सितार।
मंगल मय हो सबको दीपों का त्यौहार ,दीपों का आकाश .

Rajesh Kumari said...

bahut pyara srajan.dipawali ke jaisa hi jhilmil,jhilmil.dipawali ki shubhkamnayen.

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

आपकी यह सुन्दर प्रस्तुति कल सोमवार दिनांक 24-10-2011 को चर्चामंच http://charchamanch.blogspot.com/ की भी शोभा बनी है। सूचनार्थ

Rakesh Kumar said...

सब को शुभकामना,
सुख से हो सामना,
झिलमिल झिलमिल झिलमिल,
खुशियां छलके अपार।

वाह! बहुत सुन्दर महेंद्र जी.
आभार.
आपको भी बहुत बहुत शुभकामनाएँ.

मेरे ब्लॉग पर आईयेगा.
'नाम जप' पर अपने सुविचार और
अनुभव प्रस्तुत करके अनुग्रहित कीजियेगा मुझे.

रविकर said...

शाश्वत शिल्प उत्तम सजा, शिल्प-कला का केंद्र |
झिल्मिल झिल्मिल चमकते, शिल्पी-ब्रह्म-महेंद्र ||

शुभकामनाएं ||

vandan gupta said...

दीप पर्व की अग्रिम शुभकामनाए॥

हरकीरत ' हीर' said...

नव तारों के संकुल,
कोरस गाएं मिलजुल,
संगत करते सुर में,
फुलझडि़यों के सितार।

क्या बात है ....
मीठा मीठा रस घुला है इनमें ....

दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं .....

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') said...

संगत करते सुर में,
फुलझडि़यों के सितार।

बहुत सुन्दर मधुर गीत... वाह!
आपको सपरिवार दीप पर्व की सादर बधाईयां....

Kailash Sharma said...

बहुत सुन्दर...दीपावली की अग्रिम हार्दिक शुभकामनाएं !

रविकर said...

शुभकामनाएं ||
रचो रंगोली लाभ-शुभ, जले दिवाली दीप |
माँ लक्ष्मी का आगमन, घर-आँगन रख लीप ||
घर-आँगन रख लीप, करो स्वागत तैयारी |
लेखक-कवि मजदूर, कृषक, नौकर व्यापारी |
नहीं खेलना ताश, नशे की छोडो टोली |
दो बच्चों का साथ, रचो मिलकर रंगोली ||

Amit Chandra said...

सुंदर और बेहतरीन रचना. दीपावली की हार्दिक बधाई.

Kunwar Kusumesh said...

सब को शुभकामना,
सुख से हो सामना,
झिलमिल झिलमिल झिलमिल,
खुशियां छलके अपार.

आपको भी दीपावली की ढेरों शुभकामनायें.

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

बिलकुल दीवाली की फुलझडियों सी कविता!! बस यूं ही आपकी कविताओं का प्रकाश मिलता रहे और हमारे लिए प्रकाश स्तंभ बन मार्ग-दर्शन करे, यही हमारी कामना है!! शुभ दीपावली!!

Unknown said...

सुंदर कविता .....दीपावली की अग्रिम बधाइयाँ !

Rachana said...

नव तारों के संकुल,
कोरस गाएं मिलजुल,
संगत करते सुर में,
फुलझडि़यों के सितार।
kitni sunder upma hai
bahut sunder geet
aapko aur aapke pure parivar ko Diwali ki badhai
rachana

डॉ. मोनिका शर्मा said...

नव तारों के संकुल,
कोरस गाएं मिलजुल,
संगत करते सुर में,
फुलझडि़यों के सितार।

बहुत सुंदर रचना...... हार्दिक शुभकामनायें

Urmi said...

आपको एवं आपके परिवार के सभी सदस्य को दिवाली की हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनायें !
मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
http://seawave-babli.blogspot.com/
http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

ZEAL said...

.


पुलकित प्रकाश-पर्व,
तम का विनष्ट गर्व,
यत्र-तत्र छूट रहे
जुग-जुगनू के अनार....

झिलमिलाती हुयी सुन्दर प्रस्तुति.....
पर्व पर आपको ढेरों शुभकामनाएं...

.

मनोज कुमार said...

रचना ने देपावली का उतसाग जगा दिया।
धनतेरस और दीपावली की ढेरों शुभकामनाएं!

अरुण चन्द्र रॉय said...

बहुत सुंदर रचना....दीवाली की शुभकामनायें।

Vandana Ramasingh said...

नव तारों के संकुल,
कोरस गाएं मिलजुल,
संगत करते सुर में,
फुलझडियों के सितार
सुन्दर शब्दावली ....शुभ दीपावली

shashi purwar said...

bahut sunder , dipawali ki hardik subhkamnaye

Bharat Bhushan said...

सरल शब्दों में उत्कृष्ट भाव व्यक्त किया आपने-
झिलमिल झिलमिल झिलमिल,
खुशियां छलके अपार।
आपको दीपावली की अपार खुशिया मिलें. दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ.

Human said...

उत्कृष्ट और जगमगाती रचना,बधाई !
दीपावली की तहे दिल से आपको और सभी को शुभकामनाएं

Unknown said...

सब को शुभकामना,
सुख से हो सामना,
झिलमिल झिलमिल झिलमिल,
खुशियां छलके अपार।

बहुत ही उम्दा पंक्तियाँ!

दिवाली की हार्दिक शुभकामनायें!
जहां जहां भी अन्धेरा है, वहाँ प्रकाश फैले इसी आशा के साथ!
chandankrpgcil.blogspot.com
dilkejajbat.blogspot.com
पर कभी आइयेगा| मार्गदर्शन की अपेक्षा है|

Unknown said...

दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ!

Unknown said...

आपके जीवन में भी सितार का संगीत झंकृत हो फुलझडियों से । खुशियां तारों सी झिलमिल करें । बेहद सुंदर मन को आलोकित करने वाली प्रस्तुति ।

Satish Saxena said...

बहुत सुंदर !
दीपावली पर आपको और परिवार को हार्दिक मंगल कामनाएं !
सादर !

Amit Sharma said...

पञ्च दिवसीय दीपोत्सव पर आप को हार्दिक शुभकामनाएं ! ईश्वर आपको और आपके कुटुंब को संपन्न व स्वस्थ रखें !
***************************************************

"आइये प्रदुषण मुक्त दिवाली मनाएं, पटाखे ना चलायें"

Amrita Tanmay said...

** दीप ऐसे जले कि तम के संग मन को भी प्रकाशित करे ***शुभ दीपावली **

संजय भास्‍कर said...

प्रभावशाली प्रस्तुति
आपको और आपके प्रियजनों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें….!

संजय भास्कर
आदत....मुस्कुराने की
नई पोस्ट पर आपका स्वागत है
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

संजय भास्‍कर said...

कुछ व्यक्तिगत कारणों से पिछले 20 दिनों से ब्लॉग से दूर था
देरी से पहुच पाया हूँ

BrijmohanShrivastava said...

दीपावली केशुभअवसर पर मेरी ओर से भी , कृपया , शुभकामनायें स्वीकार करें

संजय @ मो सम कौन... said...

ऐसी भीनी भीनी शुभकामनायें मिलें तो दीपावली तो शुभ होगी ही, आपको भी हार्दिक बधाई।

Smart Indian said...

आपको, आपके मित्रों और परिजनों को भी दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें!

प्रेम सरोवर said...

आपकी प्रस्तुति अच्छी लगी । .मेरे पोस्ट पर आपका स्वागत है । दीपावली की शुभकामनाएं ।

virendra sharma said...

सब को शुभकामना,
सुख से हो सामना,
झिलमिल झिलमिल झिलमिल,
खुशियां छलके अपार।

www.navincchaturvedi.blogspot.com said...

वाह क्या लय चुनी है इस अद्भुत नवगीत की
मैं तो पढ़ते पढ़ते गा भी रहा था
आपके ब्लॉग पर आना सुखद एहसास जगाता है आ. महेंद्र जी

दिवाली-भाई दूज और नववर्ष की शुभकामनाएं

Dinesh pareek said...

बढ़िया प्रस्तुति शुभकामनायें आपको !
आप मेरे ब्लॉग पे आये आपका में अभिनानद करता हु

दीप उत्‍सव स्‍नेह से भर दीजिये
रौशनी सब के लिये कर दीजिये।
भाव बाकी रह न पाये बैर का
भेंट में वो प्रेम आखर दीजिये।
दीपोत्‍सव की हार्दिक शुभकामनाओं सहित
दिनेश पारीक