Jan 29, 2012

गीत बसंत का



सुरभित मंद समीर ले
आया है मधुमास।

                           पुष्प रंगीले हो गए
                           किसलय करें किलोल,
                           माघ करे जादूगरी
                          अपनी गठरी खोल।

गंध पचीसों तिर रहे
पवन हुए उनचास,
सुरभित मंद समीर ले
आया है मधुमास।

                           अमराई में कूकती
                          कोयल मीठे बैन,
                          बासंती-से हो गए
                          क्यूं संध्या के नैन।

टेसू के संग झूमता
सरसों का उल्लास,
सुरभित मंद समीर ले
आया है मधुमास।

                          पुलकित पुष्पित शोभिता
                         धरती गाती गीत,
                         पात पीत क्यूं हो गए
                         है कैसी ये रीत।

नृत्य तितलियां कर रहीं
भौंरे करते रास,
सुरभित मंद समीर ले
आया है मधुमास।

                                              -महेन्द्र वर्मा

53 comments:

अनुपमा त्रिपाठी... said...

bahut sunder ...geet basant ka ...

Shanti Garg said...

कुछ अनुभूतियाँ इतनी गहन होती है कि उनके लिए शब्द कम ही होते हैं !

Shanti Garg said...

बसंत पचंमी की शुभकामनाएँ।

मनोज कुमार said...

इस रचना में आपने प्रकृति के विभिन्न बिम्बों में और उसके सौंदर्य में छिपे जादुई आकर्षण को समेट कर जिस तरह से प्रस्तुत किया गया है, उसके लिए आप बधाई के पात्र है ।

Dr.J.P.Tiwari said...

पुष्प रंगीले हो गए
किसलय करें किलोल,
माघ करे जादूगरी
अपनी गठरी खोल।

पुष्प का खिलना तो प्रकृति का अपनी गाँठ खोलकर माध्री विखेरना है. माघ भी गाँठ खोल अपनी कड़क और अकड़ कम करता है और बसंत के साथ रंग जाता है. किन्त यह मन की गांठ क्यों नहीं खुलती? इसे क्या कहा जाय - मानव मन की जटिलता या उसकी संवेदनहीनता ? क्या कुछ पंक्तियों का फूट पढ़ना ही मन का उच्छ्वास है? यह तो साथी मुस्कान भर है. फिर महत्वपूर्ण यह इसलिए है कि प्रारंभ तो हुआ, विकसित होगा ही. आभार मन को कुरेदने और कुछ बात कहने कि प्रेरणा देने वाली रचना के लिए.
बसंतोस्सव की शुभकामनाएँ।.

Amrita Tanmay said...

अलौकिक छटा बिखेरती मधुमासी गीत के लिए बधाई..

Rajesh Kumari said...

bahut sundar kavita likhi hai prakarti ki khoobsurti bahut badhia chitran kiya hai vasant ki badhaai.vaqt mile to aap mere blog par bhi aamantrit hain vasant ke rango ke saath.

देवेन्द्र पाण्डेय said...

सुंदर गीत बसंत का
सुंदर शब्द आभास
वर्मा जी को शुक्रिया
पढ़कर मिटती प्यास।

ब्लॉ.ललित शर्मा said...

सुंदर मधुमास आया है
दिग दिगंत में छाया है।

अरूण साथी said...

साधु-साधु

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

नृत्य तितलियां कर रहीं
भौंरे करते रास,
सुरभित मंद समीर ले
आया है मधुमास।

मनमोहक वासंतिक गीत ......

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

बाग में बैठकर प्रकृति को निहारने का आनंद आ गया!!

veerubhai said...

अमराई में कूकती
कोयल मीठे बैन,
बासंती-से हो गए
क्यूं संध्या के नैन।
आनुप्रासिक छटा बिखरी हुई है पूरे गीत में .सुन्दर मनोहर .प्रकृति वर्णन के नए आयाम रच रहें हैं आप .

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

मधुर गीत ले कर आया ऋतुराज ..अच्छी प्रस्तुति

रेखा said...

आपकी यह रचना बहुत ही सुन्दर लगी और तुरंत ही मैंने इसे फेसबुक पर साझा भी कर लिया.

रश्मि प्रभा... said...

अल्हड़ सी चाल पुरवा की मंद मंद मुस्काए

vidya said...

बहुत सुन्दर....
शीतल सुगन्धित बयार सी कविता..

Kunwar Kusumesh said...

वसंत के मौक़े पर सामयिक और सुन्दर रचना है.

Kailash Sharma said...

बहुत खूब! लाज़वाब मनमोहक शब्द चित्र..बसन्त का बहुत सुन्दर स्वागत..

Ramakant Singh said...

पुलकित पुष्पित शोभिता
धरती गाती गीत,
पात पीत क्यूं हो गए
है कैसी ये रीत।
spreaded the fragerence of basant
through out the lines.very nice lines
thanks.

ऋता शेखर मधु said...

नृत्य तितलियां कर रहीं
भौंरे करते रास,
सुरभित मंद समीर ले
आया है मधुमास।

मनभावन गीत...

Pallavi said...

वाह क्या बात है!!! बहुत ही सुंदर शब्दों से सजी बंसत का स्वागत करती मनमोहक रचन ...

Bharat Bhushan said...

अमराई में कूकती
कोयल मीठे बैन,
बासंती-से हो गए
क्यूं संध्या के नैन।
दोहों के रूप में वसंत का वासंती गीत. बिंबों की नवीनता मन को रस से भर देती है.

प्रतिभा सक्सेना said...

वसंत का सुन्दर चित्रण !

sangita said...

बसंत पर्व का सुन्दर वर्णन है आज की पोस्ट में|

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति
आपकी इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल दिनांक 30-01-2012 को सोमवारीय चर्चामंच पर भी होगी। सूचनार्थ

विशाल said...

बहुत सुन्दर गीत लिखा है आपने ,महेंद्र जी.
बहुत बधाई.

ख़बरनामा said...

बहुत बेहतरीन .......

ZEAL said...

soft, subtle and beautiful creation...बसंत पचंमी की शुभकामनाएँ

Prem Farukhabadi said...

नृत्य तितलियां कर रहीं
भौंरे करते रास,
सुरभित मंद समीर ले
आया है मधुमास।

sundar bhav. badhai!

दीपिका रानी said...

अरे वाह। पुराने गीतों की याद दिला दी आपने। अच्छा स्वागत वसंत का!

संजय भास्कर said...

महेंद्र जी बसन्त का बहुत सुन्दर स्वागत..बसंत पचंमी की शुभकामनाएँ।

सदा said...

बहुत ही बढि़या प्रस्‍तुति ।

अनुपमा पाठक said...

मनमोहक!

जयकृष्ण राय तुषार said...

बहुत सुन्दर कविता भाई महेंद्र जी |ब्लॉग पर आने के लिए आभार |

dheerendra said...

महेंद्र जी,प्रकृति के सुंदर बिम्बो समेट कर प्रस्तुति करने के लिए बहुत२ बधाई,...
बहुत सुंदर रचना,
welcome to new post --काव्यान्जलि--हमको भी तडपाओगे....

Rahul Singh said...

मधुमास का पूर्वाभास.

vandana said...

शानदार वसंत गीत ...!!!

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) said...

शब्दों के मकरंद में ये मधुमासी छंद
अंग अंग पुलकित हुआ,हृदय बसा आनंद.

बहुत रंगीन और कोमल गीत, वाह !!!!!!!!!

वाणी गीत said...

वसंत के सभी रंग शामिल हैं एक इसी गीत में !
वासंती अभिव्यक्ति !

Urmi said...

बहुत ख़ूबसूरत और मधुर गीत! आनंद आ गया! सुन्दर प्रस्तुती!

दिगम्बर नासवा said...

नृत्य तितलियां कर रहीं
भौंरे करते रास,
सुरभित मंद समीर ले
आया है मधुमास ...

बसंत के साथ ही मधुमास का माहोल आने लगता है ... और खुशियाँ छाने लगती हैं ... सुन्दर गीत है ...

NISHA MAHARANA said...

नृत्य तितलियां कर रहीं
भौंरे करते रास,
सुरभित मंद समीर ले
आया है मधुमास।very nice.

रजनी मल्होत्रा नैय्यर said...

ye basnti geet bahut hi khub........mhendra ji bahut bahut shubhkamnayen basant ki

गिरिजा कुलश्रेष्ठ said...

गीत मधुर व सुन्दर है ।

Maheshwari kaneri said...

बासंती रंग लिए एक खूबसूरत गीत...आभार..

dinesh aggarwal said...

वासंतीय अभिव्यक्ति निःसंदेह सराहनीय...
कृपया इसे भी पढ़े
नेता,कुत्ता और वेश्या

shashi purwar said...

namaskar mahendra ji .


सुरभित मंद समीर ले
आया है मधुमास।

पुष्प रंगीले हो गए
किसलय करें किलोल,
माघ करे जादूगरी
अपनी गठरी खोल।
....bahut sunder abhivyakti .sach me basant aa gaya .bahut bahut badhai .shabdo se jhalak rahi hai umang .dekho aaya basant . sunder rachna ke liye abhar .

dheerendra said...

बहुत सुंदर रचना,लाजबाब

MY NEW POST ...40,वीं वैवाहिक वर्षगाँठ-पर...

Madhuresh said...

प्रकृति की खूबसूरतियों से भरी हुई रचना!
पहली बार आना हुआ, बहुत अच्छा लगा, धन्यवाद!

Naveen Mani Tripathi said...

basanti hawa me basanti rachana ka jhoka man ko bha gaya hai....badhai Verma ji

मिश्री की डली ज़िंदगी हो चली said...

bahut sundar prastuti...

rajendra sharma'vivek" said...

geet padhkar majaa aa gyaa