Feb 26, 2012

गीतिका



यादों को विस्मृत कर देना बहुत कठिन है,
ख़ुद को ही धोखा दे पाना बहुत कठिन है।

जाने कैसी चोट लगी है अंतःतल में,
टूटे दिल को आस बंधाना बहुत कठिन है।

तैर रही हो विकट वेदना जिनमें छल-छल,
उन आंखों की थाह जानना बहुत कठिन है।

नादानों को समझा लेंगे कैसे भी हो,
समझदार को समझा पाना बहुत कठिन है।

जीवन सरिता के इस तट पर दुख का जंगल,
क्या होगा उस पार बताना बहुत कठिन है।

झूठ बोलने वालों ने आंखें दिखलाईं,
ऐसे में सच का टिक पाना बहुत कठिन है।

मौत किसे कहते हैं यह तो सभी जानते,
जीवन को परिभाषित करना बहुत कठिन है।
                                                                       -महेन्द्र वर्मा

47 comments:

देवेन्द्र पाण्डेय said...

बेहतरीन..दिल को छू लेने वाली गीतिका।

Bharat Bhushan said...

तैर रही हो विकट वेदना जिनमें छल-छल,
उन आंखों की थाह जानना बहुत कठिन है।
वाह! बहुत ही सुंदर गीत महेंद्र जी.

ajit gupta said...

एक एक पंक्ति दिल में बसने वाली है। बहुत ही श्रेष्‍ठ रचना।

रश्मि प्रभा... said...

यादों को विस्मृत कर देना बहुत कठिन है,
ख़ुद को ही धोखा दे पाना बहुत कठिन है।... पर देते हैं धोखा खुद को ही हम , भ्रम को सत्य कहके . यादें तो हमसफ़र होती हैं

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

तैर रही हो विकट वेदना जिनमें छल-छल,
उन आंखों की थाह जानना बहुत कठिन है।

नादानों को समझा लेंगे कैसे भी हो,
समझदार को समझा पाना बहुत कठिन है।


जीवन को परिभाषित करना बहुत कठिन है ... बहुत सुंदर रचना ...

अनुपमा पाठक said...

तैर रही हो विकट वेदना जिनमें छल-छल,
उन आंखों की थाह जानना बहुत कठिन है।
वाह!

रश्मि प्रभा... said...

yadi aap mere dwara sampadit kavy sangrah mein shamil hona chahte hain to sampark karen
rasprabha@gmail.com

vidya said...

वाह!!
नादानों को समझा लेंगे कैसे भी हो,
समझदार को समझा पाना बहुत कठिन है।

बहुत सुन्दर!!!

शालिनी कौशिक said...

नादानों को समझा लेंगे कैसे भी हो,
समझदार को समझा पाना बहुत कठिन है।
bahut sahi v bhavpoorn prastuti.

डा.राजेंद्र तेला"निरंतर"(Dr.Rajendra Tela,Nirantar)" said...

aasaan nahee jeevan mein kuchh
sab kathin hai
sahajtaa se le lo agar
kathinaayee kam hotee

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') said...

दिल को छूती हुई गीतिका आदरणीय महेंद्र सर....
सादर बधाई स्वीकारें...

Naveen Mani Tripathi said...

जीवन सरिता के इस तट पर दुख का जंगल,
क्या होगा उस पार बताना बहुत कठिन है।

झूठ बोलने वालों ने आंखें दिखलाईं,
ऐसे में सच का टिक पाना बहुत कठिन है।

VERMA JI KYA LIKHUN .....GAJAB KI ABHIVYKTI ....AK AK SHER SMARNEEY HAI ....BILKUL ANTARMAN KO CHHOOTI HUI .....APKI ES RACHANA KO NAMAN...SATH HI APKO SADAR BADHAI

veerubhai said...

मौत किसे कहते हैं यह तो सभी जानते,
जीवन को परिभाषित करना बहुत कठिन है।
शानदार ग़ज़ल .जीवन की पहेली और दार्शनिकता को छिपाए .

Ramakant Singh said...

नादानों को समझा लेंगे कैसे भी हो,
समझदार को समझा पाना बहुत कठिन है।
.दिल को छू लेने वाली
DADA AAP BAHUT KHUBSURAT LIKHATE HAIN
BAR BAR PADANELAYAK.
PRANAM.

वन्दना said...

सच कहा हर कठिनाई से पार पाना बहुत कठिन है।

vandana said...

नादानों को समझा लेंगे कैसे भी हो,
समझदार को समझा पाना बहुत कठिन है।

तैर रही हो विकट वेदना जिनमें छल-छल,
उन आंखों की थाह जानना बहुत कठिन है।

बहुत सुन्दर गीतिका

काजल कुमार Kajal Kumar said...

वाह महेन्‍द्र जी सुंदर

प्रेम सरोवर said...

बहुत सुंदर प्रस्तुति । Welcome to my New Post.

Udan Tashtari said...

कठिन तो बहुत है...यूँ उन्हें शब्द दे देना भी बहुत कठिन है...बहुत खूब!!

Amit Chandra said...

मौत किसे कहते हैं यह तो सभी जानते,
जीवन को परिभाषित करना बहुत कठिन है।

बेहद उम्दा.

सादर.

कुश्वंश said...

तैर रही हो विकट वेदना जिनमें छल-छल,
उन आंखों की थाह जानना बहुत कठिन है।

निरुत्तर करती पंक्तियाँ, कवि की सार्थक उड़ान बधाई

संजय @ मो सम कौन ? said...

बहुत सारगर्भित गीतिका है। सरल शब्दों में गहरे भाव समेट लेते हैं आप।

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...
This comment has been removed by the author.
चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति
आपकी इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल दिनांक 27-02-2012 को सोमवारीय चर्चामंच पर भी होगी। सूचनार्थ

रविकर said...

कर छल का एहसास पुन: ,

छलके नैनों के बाद रही ।

खाकर धोखा भूल गया,

पर याद तुम्हारी याद रही ।।

dheerendra said...

महेंद्र जी,..खुद को धोखा दे पाना बहुत कठिन है,.
अति उत्तम,सराहनीय प्रस्तुति,सुंदर रचना के लिए बधाई,...फालोवर बन रहा हूँ

NEW POST काव्यान्जलि ...: चिंगारी...

शिखा कौशिक said...

यादों को विस्मृत कर देना बहुत कठिन है,
ख़ुद को ही धोखा दे पाना बहुत कठिन है।
sateek bat v sarthak prastuti .aabhar

दीपिका रानी said...

झूठ बोलने वालों ने आंखें दिखलाईं,
ऐसे में सच का टिक पाना बहुत कठिन है..
बहुत सुंदर

Amrita Tanmay said...

गहरे तक जाती गीतिका बस ..मोहित कर रही है..

ZEAL said...

तैर रही हो विकट वेदना जिनमें छल-छल,
उन आंखों की थाह जानना बहुत कठिन है...

हर पंक्ति में एक 'दर्शन' छुपा है...

.

Asha Saxena said...

गीतिका बहुत सुन्दर हैं |
आशा

Pallavi said...

जीवन को परिभाषित कर पाना बहुत कठिन है...
वाकई सच कहा आपने सार्थक रचना....

पुरुषोत्तम पाण्डेय said...

अच्छी सवेदनापूर्ण सार्थक रचना.

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

भावों की इतनी सुन्दर अभिव्यक्ति पर तो
कुछ भी कहना, कुछ भी सुनना बड़ा कठिन है!!

ऋता शेखर मधु said...

नादानों को समझा लेंगे कैसे भी हो,
समझदार को समझा पाना बहुत कठिन है।

बिल्कुल सही...

रजनी मल्होत्रा नैय्यर said...

यादों को विस्मृत कर देना बहुत कठिन है,
ख़ुद को ही धोखा दे पाना बहुत कठिन है।..

बहुत ही सुन्दर रचना,
पर हम जीवन की राह में कई बार ख़ुद को भरम में डाल कर ख़ुद को धोखा दे देते हैं......

Kunwar Kusumesh said...

जी,बहुत कठिनाई है जीवन में,वर्मा जी

Rakesh Kumar said...

आपकी प्रस्तुति भावपूर्ण और विचारोत्तेजक है.
कठनाईयों में सधना ही असल साधना है.

अनुपम प्रस्तुति के लिए आभार,महेंद्र जी.

Kailash Sharma said...

जीवन सरिता के इस तट पर दुख का जंगल,
क्या होगा उस पार बताना बहुत कठिन है।

....बिलकुल सच....जीवन की सच्चाई को सटीकता से व्यक्त करती बहुत सुंदर रचना...

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

नादानों को समझा लेंगे कैसे भी हो,
समझदार को समझा पाना बहुत कठिन है।

Ji .... Sach kaha... Bahut Sunder

Dr.NISHA MAHARANA said...

तैर रही हो विकट वेदना जिनमें छल-छल,
उन आंखों की थाह जानना बहुत कठिन है।waah....

दिगम्बर नासवा said...

जीवन सरिता के इस तट पर दुख का जंगल,
क्या होगा उस पार बताना बहुत कठिन है ..

बरबस ये पंक्तियाँ याद आ गयीं ... इस पार प्रिय तुम रहती हो उस पर न जाने क्या होगा ... बहुत खूब ...

Apanatva said...

asardar vazandar gitika .

Apanatva said...

asardar vazandar gitika .

amrendra "amar" said...

यादों को विस्मृत कर देना बहुत कठिन है,
ख़ुद को ही धोखा दे पाना बहुत कठिन है।
bahut sunder rachna

lokendra singh rajput said...

नादानों को समझा लेंगे कैसे भी हो,
समझदार को समझा पाना बहुत कठिन है....
इस रचना की तारीफ लायक शब्द जुटा पाना कठिन है।

expression said...

बहुत प्यारी रचना,,
दिल को छू गयी..
सादर नमन.