Mar 11, 2012

नवगीत



पल-पल छिन-छिन बीत रहा है,
जीवन से कुछ रीत रहा है।

                    सहमे-सहमे से सपने हैं,
                    आशा के अपरूप,
                    वक्र क्षितिज से सूरज झाँके,
                    धुँधली-धुँधली धूप।

तरस न खाओ मेरे हाल पर,
मेरा भव्य अतीत रहा है।
पल-पल छिन-छिन बीत रहा है,
जीवन से कुछ रीत रहा है।


                    छला गया मीठी बातों से,
                    नाजुक मन भयभीत।
                    मिले सभी को अंतरिक्ष से,
                    जीवन का संगीत।

अब तक कानों में जो गूँजा,
कोई काँपता गीत रहा है।
पल-पल छिन-छिन बीत रहा है,
जीवन से कुछ रीत रहा है।

                                                

                                                   -महेन्द्र वर्मा







41 comments:

Anupama Tripathi said...

हृदयस्पर्शी ...बहुत ही सुंदर रचना ...

ऋता शेखर मधु said...

तरस न खाओ मेरे हाल पर,
मेरा भव्य अतीत रहा है।

बहुत ही सुंदर!

दीपिका रानी said...

बहुत सुंदर गीत है.. दिल से कहा हुआ

ब्लॉ.ललित शर्मा said...

सुंदर नवगीत - आभार वर्मा जी

वन्दना said...

बहुत सुन्दर नवगीत

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') said...

सहमे-सहमे से सपने हैं,
आशा के अपरूप,
वक्र क्षितिज से सूरज झाँके,
धुँधली-धुँधली धूप।

वाह! बहुत खुबसूरत नवगीत सर...
सादर.

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत सुंदर नवगीत ... जैसे सबके मन की बात कह दी हो ...

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

मन में सीधा प्रवेश करता नवगीत!!

Ramakant Singh said...

छला गया मीठी बातों से,
नाजुक मन भयभीत।
मिले सभी को अंतरिक्ष से,
जीवन का संगीत।
beautiful lines withgreat emotions.

veerubhai said...

तरस न खाओ मेरे हाल पर,
मेरा भव्य अतीत रहा है।
पल-पल छिन-छिन बीत रहा है,
जीवन से कुछ रीत रहा है।
आत्म विशवास और आत्म विश्लेषण ही तो हासिल है ज़िन्दगी का .बहतरीन रचना .

दिगम्बर नासवा said...

बहुत ही सुन्दर ... मन मोहक नव गीत है ... ह्रदय में उतरता हुवा ...

शालिनी कौशिक said...

bahut hi sundar prastuti.

रविकर said...

गाफिल जी हैं व्यस्त, चलो चलें चर्चा करें,
शुरू रात की गश्त, हस्त लगें शम-दस्यु कुछ ।

आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति
सोमवारीय चर्चा-मंच पर है |

charchamanch.blogspot.com

ashish said...

सुँदर नवगीत , आभार .

ashish said...

सुँदर नवगीत , आभार .

संध्या शर्मा said...

बहुत सुन्दर नवगीत...आभार

vandana said...

सहमे-सहमे से सपने हैं,
आशा के अपरूप,
वक्र क्षितिज से सूरज झाँके,
धुँधली-धुँधली धूप।

तरस न खाओ मेरे हाल पर,
मेरा भव्य अतीत रहा है।

मर्मस्पर्शी पंक्तियाँ

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

हृदयस्पर्शी गीत ....

Chirag Joshi said...

ummdaa
badi hi shandar kavita
man praffulit ho gaya

expression said...

बहुत बहुत सुन्दर गीत..........
काव्य की ये विधा है ही बड़ी सहज...

शुक्रिया.

Rajput said...

पल-पल छिन-छिन बीत रहा है,
जीवन से कुछ रीत रहा है।

बहुत सुंदर भावों में पिरोया गया नवगीत .

Bhushan said...

उदासी पर चलता गीत मधुर भावों को जगाता चलता है. इस दृष्टि से इसे एक अद्भुत गीत कहा जा सकता है. बहुत ख़ूब महेंद्र जी.

shashi purwar said...

sunder navgeet
अब तक कानों में जो गूँजा,
कोई काँपता गीत रहा है।
पल-पल छिन-छिन बीत रहा है,
जीवन से कुछ रीत रहा है।..............behatarin prastuti . badhai .

Dr.Ashutosh Mishra "Ashu" said...

taras naa khaao mere haal par mera bhavya ateet...sach hai..behtarin rachna sadar badhayee aaur amantran ke sath

रंजना said...

अस्वस्थता और व्यस्तता ने लम्बे समय से ऐसे सुमनोहर रचनाओं से वंचित कर रखा था...

आज अवसर मिला और पढ़कर जो सुख आह्लाद मिला, शब्दों में नहीं बता सकती..

क्या तो लिखा है आपने...ओह...!!!

उपेन्द्र नाथ said...

पल-पल छिन-छिन बीत रहा है,
जीवन से कुछ रीत रहा है।

bahu hi gahre jajbat ke sath likha sunder navgit...

Dr.Ashutosh Mishra "Ashu" said...

manbhavan ..sunder prastuti..sadar badhayee aaur amantran ke sath

veerubhai said...

हर बार रसीला लगता है यह गीत ,कहो इसे नवगीत ...

जयकृष्ण राय तुषार said...

भाई महेंद्र जी बहुत ही सुंदर गीत बधाई |

mark rai said...

बहुत सुंदर गीत..........

मनोज कुमार said...

यह कविता आपके विशिष्ट कवि-व्यक्तित्व का गहरा अहसास कराती है।

Amrita Tanmay said...

तरंगित, आप्लावित कर रही है ये उत्कृष्ट रचना..

मनीष सिंह निराला said...

छला गया मीठी बातों से,
नाजुक मन भयभीत।
मिले सभी को अंतरिक्ष से,
जीवन का संगीत।

सुन्दर प्रस्तुति !
आभार !

ZEAL said...

अब तक कानों में जो गूँजा,
कोई काँपता गीत रहा है।
पल-पल छिन-छिन बीत रहा है,
जीवन से कुछ रीत रहा है।
Beautiful expression .

.

P.N. Subramanian said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति. पलछिन को दिखाऊँगा.

प्रेम सरोवर said...

आपके पोस्ट पर आना सार्थक हुआ । प्रस्तुति अच्छी लगी । मेरे पोस्ट पर आपका इंतजार रहेगा । धन्यवाद ।

प्रतिभा सक्सेना said...

सुन्दर अभिव्यक्ति!

संजय @ मो सम कौन ? said...

सच में जीवन से कुछ रीत रहा है..

mridula pradhan said...

bahut sunder geet likha hai aapne......

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) said...

छला गया मीठी बातों से,
नाजुक मन भयभीत।
मिले सभी को अंतरिक्ष से,
जीवन का संगीत।

अब तक कानों में जो गूँजा,
कोई काँपता गीत रहा है।

बहुत नाजुक सा गीत, वाह....

lokendra singh rajput said...

तरस न खाओ मेरे हाल पर,
मेरा भव्य अतीत रहा है।
पल-पल छिन-छिन बीत रहा है,
जीवन से कुछ रीत रहा है।.....
महेन्द्र जी, बहुत खूबसूरत गीत है। आनंद आ गया। धन्यवाद स्वीकार करें।