आगत की चिंता नहीं



धनमद-कुलमद-ज्ञानमद, दुनिया में मद तीन,
अहंकारियों से मगर, मति लेते हैं छीन।

गुणी-विवेकी-शीलमय, पाते सबसे मान,
मूर्ख किंतु करते सदा, उनका ही अपमान।

जला हुआ जंगल पुनः, हरा-भरा हो जाय,
कटुक वचन का घाव पर, भरे न कोटि उपाय।

चिंतन और विमर्श में, गुणीजनों का नाम,
व्यर्थ कलह करना मगर, मूर्खों का है काम।

मूर्ख-अहंकारी-पतित, क्रोधी अरु मतिहीन,
इनका संग न कीजिए, कहते लोग कुलीन।

जो जैसा भोजन करे, वैसा ही मन जान,
गुण उसके अनुरूप हो, वैसी हो संतान।

आगत की चिंता नहीं, गत का करें न शोक,
वर्तमान सुध लीजिए, सुख पाएं इहलोक।


                                                                                        -महेन्द्र वर्मा

38 comments:

Bharat Bhushan said...

आगत की चिंता नहीं, गत का करें न शोक,
वर्तमान सुध लीजिए, सुख पाएं इहलोक।

यह भारतीय मनीषा का सुंदर सार कह दिया आपने. जो वर्तमान में है वह सुखी रह सकता हैं. बहुत ही सुंदर नीति दोहे.

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

मूर्ख-अहंकारी-पतित, क्रोधी अरु मतिहीन,
इनका संग न कीजिए, कहते लोग कुलीन।

बहुत अच्छी प्रस्तुति,,,सुंदर प्रेरक दोहे,,,,,,

MY RECENT POST काव्यान्जलि ...: बहुत बहुत आभार ,,

Anupama Tripathi said...

बहुत बढ़िया दोहे ...सार्थक और उत्कृष्ट ...!!

अनुपमा पाठक said...

सुन्दर सार्थक दोहे...!

मनोज कुमार said...

एक-एक दोहे में असंख्य नीति की बातें हैं। सबके सब अमल में लाने लायक़। बहुत आनन्द आया इन्हें पढ़कर।

डॉ. मोनिका शर्मा said...

जला हुआ जंगल पुनः, हरा-भरा हो जाय,
कटुक वचन का घाव पर, भरे न कोटि उपाय।

सुंदर दोहे...

प्रतिभा सक्सेना said...

'चिंतन और विमर्श में, गुणीजनों का नाम,
व्यर्थ कलह करना मगर, मूर्खों का है काम।'
- इस बात को लोग समझ जायें तो सारा झंझट खत्म !

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

जला हुआ जंगल पुनः, हरा-भरा हो जाय,
कटुक वचन का घाव पर, भरे न कोटि उपाय।

चिंतन और विमर्श में, गुणीजनों का नाम,
व्यर्थ कलह करना मगर, मूर्खों का है काम।

सटीक बात कहते सारे दोहे .... सुंदर प्रस्तुति

Dr.NISHA MAHARANA said...

आगत की चिंता नहीं, गत का करें न शोक,
वर्तमान सुध लीजिए, सुख पाएं इहलोक।
bilkul sahi ....

Vandana Ramasingh said...

धनमद-कुलमद-ज्ञानमद, दुनिया में मद तीन,
अहंकारियों से मगर, मति लेते हैं छीन।

सार्थक चिंतन

Rahul Singh said...

अनुभव सिद्ध दृष्टि के दोहे.

Shekhar Suman said...

बहुत खूब.... आपके इस पोस्ट की चर्चा आज 29-6-2012 ब्लॉग बुलेटिन पर प्रकाशित है ..अपने बच्चों के लिए थोडा और बलिदान करें.... .धन्यवाद.... अपनी राय अवश्य दें...

अजित गुप्ता का कोना said...

महेन्‍द्र जी एक से बढ़कर एक दोहे हैं।

Unknown said...

जला हुआ जंगल पुनः, हरा-भरा हो जाय,
कटुक वचन का घाव पर, भरे न कोटि उपाय।

sangrahniy dohe aur sath hi chintaniy

रविकर said...

अति सुन्दर दोहे |
हमें मोहे |
खूब मोहे ||

Asha Lata Saxena said...

बहुत भावपूर्ण दोहे |
'जला हुआ जंगल -------कटु वचन का घाव पर भरे न कोटि उपाय |"
आशा

vandan gupta said...

बहुत बढ़िया दोहे

Maheshwari kaneri said...

आगत की चिंता नहीं, गत का करें न शोक,
वर्तमान सुध लीजिए, सुख पाएं इहलोक।..
..बहुत अच्छी प्रस्तुति,,,सुंदर प्रेरक दोहे,,,,,,आभार

Arvind Jangid said...

आगत की चिंता नहीं, गत का करें न शोक,
वर्तमान सुध लीजिए, सुख पाएं इहलोक। बहुत सुन्दर

Satish Saxena said...

प्रभावशाली रचना ...
आभार आपका !

संध्या शर्मा said...

सुंदर प्रेरक दोहे...आभार

शिवनाथ कुमार said...

सुंदर दोहों की खुबसूरत प्रस्तुति ..
आभार !!

संजय भास्‍कर said...

चिंतन और विमर्श में, गुणीजनों का नाम,
व्यर्थ कलह करना मगर, मूर्खों का है काम।

सटीक बात कहते सारे दोहे .... सुंदर प्रस्तुति महेंदर जी
................................

ANULATA RAJ NAIR said...

बहुत सुन्दर प्रभावशाली एवं प्रेरक दोहे.....

सादर
अनु

लोकेन्द्र सिंह said...

सभी दोहे जीवन का गीत सुना रहे है

ऋता शेखर 'मधु' said...

धनमद-कुलमद-ज्ञानमद, दुनिया में मद तीन,
अहंकारियों से मगर, मति लेते हैं छीन।

प्रभुता पाई केई मद नाहिं...नीतिपरक सभी दोहे उत्कृष्ट हैं|

शिवनाथ कुमार said...

हरेक दोहे प्रेरक एवं काफी खुबसूरत हैं !!
आपकी लेखनी को प्रणाम !
साभार !!

Kailash Sharma said...

आगत की चिंता नहीं, गत का करें न शोक,
वर्तमान सुध लीजिए, सुख पाएं इहलोक।

...भारतीय जीवन दर्शन का निचोड़...सार्थक संदेश देते सभी दोहे बहुत सुन्दर...

Priyarajan said...
This comment has been removed by the author.
Priyarajan said...

I read your post interesting and informative. I am doing research on bloggers who use effectively blog for disseminate information.My Thesis titled as "Study on Blogging Pattern Of Selected Bloggers(Indians)".I glad if u wish to participate in my research.Please contact me through mail. Thank you.

http://priyarajan-naga.blogspot.in/2012/06/study-on-blogging-pattern-of-selected.html

virendra sharma said...

बोध और शोध ,नीति और पर्यावरण लिए आती हैं महेंद्र वर्मा जी की दोहावालियाँ .आनंद रस वर्षण करतीं हैं दोहावालियाँ ,मन को हर्षित करती हैं दोहावालियाँ .

sm said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति

ZEAL said...

आगत की चिंता नहीं, गत का करें न शोक,
वर्तमान सुध लीजिए, सुख पाएं इहलोक।...

Very motivating and inspiring couplets. Thanks Verma ji.

.

Rakesh Kumar said...

अनमोल वचन.

सुन्दर निति वाक्य जीवन
संवारने की क्षमता रखते हैं.

Smart Indian said...

सुन्दर और उपयोगी दोहे, धन्यवाद!

पूनम श्रीवास्तव said...

sir----
bahut bahut hi prabhav- shali prastuti----
bahut hi achhi lagi-----
dhanyvaad sahit
poonam

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') said...

बहुत सुन्दर दोहे सर...
सादर.

Anonymous said...

Write more, thats all I have to say. Literally, it seems
as though you relied on the video to make your point.
You obviously know what youre talking about, why throw away your
intelligence on just posting videos to your weblog when you
could be giving us something informative to read?
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