May 31, 2013

संत बाबा किनाराम


                                   बनारस  जिले की चंदौली तहसील के रामगढ़ गांव में अकबर सिंह और मनसा देवी के घर जिस बालक ने जन्म लिया वही प्रसिद्ध संत बाबा किनाराम हुए। 12 वर्ष की अवस्था में इन्होंने गृह त्याग कर अध्यात्म की राह पकड़ी। बलिया जिले के कारों गांव निवासी बाबा शिवराम इनके गुरु थे। काशी में इन्होंने केदार घाट के बाबा कालूराम अघोरी से दीक्षा प्राप्त की। अपने गुरु की स्मृति में इन्होंने 4 मठों का निर्माण कराया। इनकी जन्मस्थली रामगढ़ में बाबा किनाराम का आध्यात्मिक आश्रम है।
                                  ये कवि भी थे। इनकी प्रधान रचना ‘विवेकसार‘ है। अन्य प्रकाशित रचनाएं ‘रामगीता‘, ‘गीतावली‘, ‘रामरसाल‘ आदि हैं। इनकी रचनाओं से इनके अवधूत मत का सहज ही अनुमान हो जाता है।

प्रस्तुत है बाबा किनाराम रचित एक पद-

कथें ज्ञान असनान जग्य व्रत, उर में कपट समानी।
प्रगट छांडि करि दूरि बतावत, सो कैसे पहचानी।
हाड़ चाम अरु मांस रक्त मल, मज्जा को अभिमानी।
ताहि खाय पंडित कहलावत, वह कैसे हम मानी।
पढ़े पुरान कुरान वेद मत, जीव दया नहिं जानी।
जीवनि भिन्न भाव करि मारत, पूजत भूत भवानी।
वह अद्ष्ट सूझ नहिं तनिकौ, मन में रहै रिसानी।
अंधहि अंधा डगर बतावत, बहिरहि बहिरा बानी।
राम किना सतगुरु सेवा बिनु, भूलि मरो अज्ञानी।।


15 comments:

आर्यावर्त डेस्क said...

प्रभावी !!!
शुभकामना
आर्यावर्त

vandan gupta said...

आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा शनिवार(1-6-2013) के चर्चा मंच पर भी है ।
सूचनार्थ!

vandan gupta said...

आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा शनिवार(1-6-2013) के चर्चा मंच पर भी है ।
सूचनार्थ!

Kavita Rawat said...

संत बाबा किनाराम के बारे में बहुत बढ़िया जानकारी और उनके सुन्दर पद प्रस्तुतिकरण हेतु धन्यवाद

राजेश सिंह said...

इनके सम्बन्ध में एक घटना "बहती गंगा " नामक पुस्तक में पढ़ी थी जिसमें राजा चेत सिंह का भी जिक्र था शायद वही हैं.बनारस वाले.

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

बहुत उम्दा,बाबा जी की रचना साझा करने के लिए आभार ,,

Recent post: ओ प्यारी लली,

Jyoti khare said...

प्रभावशाली एवं चिंतनपरक
उत्कृष्ट प्रस्तुति
बधाई

आग्रह हैं पढ़े,मेरे ब्लॉग का अनुसरण करें
तपती गरमी जेठ मास में---
http://jyoti-khare.blogspot.in

Shalini kaushik said...

बहुत सार्थक प्रस्तुति .आभार . संस्कृति रक्षण में महिला सहभाग साथ ही जानिए संपत्ति के अधिकार का इतिहास संपत्ति का अधिकार -3महिलाओं के लिए अनोखी शुरुआत आज ही जुड़ेंWOMAN ABOUT MAN

Shikha Kaushik said...

सार्थक जानकारी हेतु आभार . . हम हिंदी चिट्ठाकार हैं.
BHARTIY NARI .

एक छोटी पहल -मासिक हिंदी पत्रिका की योजना

अभिमन्‍यु भारद्वाज said...

अनुपम, अद़भुद, अतुलनीय, अद्वितीय, निपुण, दक्ष, बढ़िया रचना
महोदय जिस प्रकार आप हिन्‍दी का प्रचार प्रसार कर रहे हैं एक छोटी सी कोशिश मैं भी कर रहा हॅू क़पया सानिध्‍य प्रदान करें तथा
हिन्‍दी तकनीकी क्षेत्र की रोचक और ज्ञानवर्धक जानकारियॉ प्राप्‍त करने के लिये एक बार अवश्‍य पधारें
टिप्‍पणी के रूप में मार्गदर्शन प्रदान करने के साथ साथ पर अनुसरण कर अनुग्रहित करें
MY BIG GUIDE
नई पोस्‍ट
इन्‍टरनेट पर हिन्‍दी सर्च इंजन
अपने ब्‍लाग के लिये सर्च इंजन बनाइये

Maheshwari kaneri said...

संत बाबा किनाराम के बारे में बहुत बढ़िया जानकारी ..आभार

महेन्द्र श्रीवास्तव said...

अच्छी जानकारी, प्रस्तुतिकरण तो वाकई बेजोड़ है।
बहुत सुंदर


नोट : आमतौर पर मैं अपने लेख पढ़ने के लिए आग्रह नहीं करता हूं, लेकिन आज इसलिए कर रहा हूं, ये बात आपको जाननी चाहिए। मेरे दूसरे ब्लाग TV स्टेशन पर देखिए । धोनी पर क्यों खामोश है मीडिया !
लिंक: http://tvstationlive.blogspot.in/2013/06/blog-post.html?showComment=1370150129478#c4868065043474768765

रचना दीक्षित said...

संत बाबा किनाराम के बारे में बहुत बढ़िया जानकारी और बाबा जी की रचना पद हम सभी को पढवाने के लिये शुक्रिया.

दिगंबर नासवा said...

हाड़ चाम अरु मांस रक्त मल, मज्जा को अभिमानी।
ताहि खाय पंडित कहलावत, वह कैसे हम मानी..

बहुत ही धन्यवाद ... बाबा जी को प्रणाम ... अलग ही मज़ा है इस काव्य धारा में ...

Vandana Ramasingh said...

नई जानकारी वाली पोस्ट ....आभार