Jun 23, 2013

बिना बोले



विपत बनाती मनुज को, दुर्बल न बलवान,
वह तो केवल यह कहे, क्या है तू, ये जान।

कौन, कहां मैं, किसलिए, खुद से पूछें आप,
सहज विवेकी बन रहें, कम होगा संताप।

मूर्खों के सम्मुख स्वयं, जो बनते विद्वान,
विद्वानों के सामने, वही मूर्ख पहचान।

क्रोध जीतिए शांति से, मृदुता से अभिमान,
व्यर्थवादिता मौन से, लोभ जीतिए दान।

बड़े बिना बोले बचन, करते यों व्यवहार,
विनय सिखाते लघुन को, करते पर उपकार।


                                                                          
                                                                      -महेन्द्र वर्मा

13 comments:

Anupama Tripathi said...

Bahut sunder evam shikshaprad

Shalini Kaushik said...

मूर्खों के सम्मुख स्वयं, जो बनते विद्वान,
विद्वानों के सामने, वही मूर्ख पहचान।
very right .nice presentation of feelings .

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

कौन, कहां मैं, किसलिए, खुद से पूछें आप,
सहज विवेकी बन रहें, कम होगा संताप।


सभी दोहे बहुत सुंदर और संदेश देने वाले ... आभार

निहार रंजन said...

शिक्षित करती पंक्तियाँ. बहुत उम्दा लिखा है आपने.

प्रतिभा सक्सेना said...

नीति के दोहे बहुत अर्थपूर्ण हैं लेकिन
'कौन, कहां मैं, किसलिए, खुद से पूछें आप..'
- ये बड़े गहरे प्रश्न हैं !

vandana said...

विपत बनाती मनुज को, दुर्बल न बलवान,
वह तो केवल यह कहे, क्या है तू, ये जान।
कौन, कहां मैं, किसलिए, खुद से पूछें आप,
सहज विवेकी बन रहें, कम होगा संताप।

बहुत अच्छे दोहे

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

मूर्खों के सम्मुख स्वयं, जो बनते विद्वान,
विद्वानों के सामने, वही मूर्ख पहचान।

बहुत बढ़िया,सुंदर दोहे,,

Recent post: एक हमसफर चाहिए.

Ramakant Singh said...

क्रोध जीतिए शांति से, मृदुता से अभिमान,
व्यर्थवादिता मौन से, लोभ जीतिए दान।
सदैव की भांति निश्छल दोहे प्रणाम

दिगम्बर नासवा said...

क्रोध जीतिए शांति से, मृदुता से अभिमान,
व्यर्थवादिता मौन से, लोभ जीतिए दान।..

लाजवाब दोंहे हैं महेंद्र जी ... एक से बढ़ के एक .... सार्थक सन्देश देते ...

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी said...

लाजवाब...प्रभावी और सटीक दोहे....बहुत बहुत बधाई...

संजय भास्‍कर said...

कौन, कहां मैं, किसलिए, खुद से पूछें आप,
सहज विवेकी बन रहें, कम होगा संताप।


सभी दोहे बहुत सुंदर और संदेश देने वाले...आभार महेंद्र जी

रचना दीक्षित said...

बहुत बढ़िया सन्देश देती प्रस्तुति.

आभार.

Anurag Sharma said...

प्रेरक दोहे