May 25, 2016

मन के नयन



मन के नयन खुले हैं जब तक,
सीखोगे तुम जीना तब तक ।

दीये को कुछ ऊपर रख दो,
पहुँचेगा उजियारा सब तक ।

शोर नहीं बस अनहद से ही,
सदा पहुँच जाएगी रब तक।

दिल दरिया तो छलकेगा ही,
तट भावों को रोके कब तक।

जान नहीं पाया हूँ  कुछ भी,
जान यही पाया हूँ अब तक।

-महेन्द्र वर्मा

18 comments:

पंखुडी said...

मन के नयन खुले हैं जब तक,
सीखोगे तुम जीना तब तक ।

वाह.....बहुत ही सुंदर प्रस्तुति..

निहार रंजन said...

मज़ा आ गया पढ़कर .

HARSHVARDHAN said...

आज की बुलेटिन अमर क्रांतिकारी रासबिहारी बोस और ब्लॉग बुलेटिन में आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है। सादर ... अभिनन्दन।।

Bharat Bhushan said...

कविता की सादगी में कविता के भावों का जादू छिपा है.

दीये को कुछ ऊपर रख दो,
पहुँचेगा उजियारा सब तक ।

जान नहीं पाया हूँ कुछ भी,
जान यही पाया हूँ अब तक।

ये पंक्तियाँ तो कमाल हैं.

जमशेद आज़मी said...

बहुत ही सुंदर और प्रभावी रचना की प्रस्‍तुति। मुझे बहुत ही अच्‍छी लगी।

सुशील कुमार जोशी said...

सुन्दर ।

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

वर्मा सा.
सादगी के साथ दर्शन का पुट आपकी ही ग़ज़लों में दिखता है. सदा प्रेरित करने वाला. मक़्ते ने ग़ज़ब का प्रभाव पैदा किया है. जो समझ गया वो ज्ञानी! प्रणाम स्वीकारें हमारा!

डॉ. मोनिका शर्मा said...

बहुत सुंदर पंक्तियाँ .... अर्थपूर्ण

Hindikunj said...

बहुत अच्छी पोस्ट !
"हिंदीकुंज"

Kailash Sharma said...

दीये को कुछ ऊपर रख दो,
पहुँचेगा उजियारा सब तक ।
>>>वाह...लाज़वाब...अद्भुत अभिव्यक्ति...

Vandana Ramasingh said...

दीये को कुछ ऊपर रख दो,
पहुँचेगा उजियारा सब तक ।


हमेशा की तरह कमाल की ग़ज़ल आदरणीय

दिगंबर नासवा said...

बहुत सुन्दर .... हिंदी के शेर सीधे दिल में उतर रहे हैं ...
कमाल की ग़ज़ल ...

दिगंबर नासवा said...

बहुत सुन्दर .... हिंदी के शेर सीधे दिल में उतर रहे हैं ...
कमाल की ग़ज़ल ...

sameer said...

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Hindikunj said...

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति !
हिन्दीकुंज,Hindi Website/Literary Web Patrika

dj said...

शोर नहीं बस अनहद से ही,
सदा पहुँच जाएगी रब तक।

दिल दरिया तो छलकेगा ही,
तट भावों को रोके कब तक। बहुत ही सुंदर रचना गहरा दर्शन समेटे। लाजवाब है हर ेक पंक्ति

Unknown said...

दीये को कुछ ऊपर रख दो,
पहुँचेगा उजियारा सब तक ।

शोर नहीं बस अनहद से ही,
सदा पहुँच जाएगी रब तक।

बहुत ही सुंदर तत्वज्ञान। बहुत दिनों बाद आपको पढा, बेहद भाया।

Unknown said...

शोर नही बस अनहद से ही......लाजवाब