आज एक ग़ज़ल 

खामोशी भी कह देती हैं सारी बातें

तनहाई में जिनको सुकून सा मिलता है,
आईना भी उनको दुश्मन सा लगता है।


किसको आखि़र हम अपनी फरियाद सुनाएं,
हर चेहरा फरियादी जैसा ही दिखता है।


दिल में उसके चाहे जो हो, तुझको क्या,
होठों से तो तेरा नाम जपा करता है।


तेरी जिन आंखों में फागुन का डेरा था,
बात हुई क्या, उनमें अब सावन बसता है।


किसी परिंदे के पर चाहे, काटो फिर भी,
दूर उफ़क तक उसका मन उड़ता फिरता है।


ख़ामोशी भी कह देती हैं सारी बातें,
दिल की बातें कोई कब मुंह से कहता हैं।


वो तो दीवाना है, उसकी बातें छोड़ों,
अपने ग़म को ही अपनी ग़ज़लें कहता है।

                                                                         -महेन्द्र वर्मा

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